टेलीकम्युनिकेशन्स कंसलटेंट्स इंडिया लिमिटेड
(भारत सरकार का उद्यम)
IS/ISO 9001 2000

चित्र दीर्घा

माननीय श्री एस एम कृष्णा, विदेश मंत्री ने 16 अगस्त, 2010 को टीसीआईएल भवन, नई दिल्ली में पैन अफ्रीकी ई-नेटवर्क परियोजना के द्वितीय चरण का उद्घाटन टीसीआईएल भवन में किया। इस चरण में 12 देश शामिल है। इस अवसर पर अफ्रीकी देशों के उच्चायुक्त तथा राजदूत और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठं अधिकारीगण उपस्थित थे। 12 देशों में, बोत्सवाना, बुरूंडी, मोजाम्बिक, डि्जबोटी, मिस्र, इरिट्रिया, लिबिया, मलावी, सोमालिया, उगांडा और जाम्बिया शामिल हैं।

विदेशमंत्री ने नेटवर्क के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से बारह देशों में प्रत्येक देश के उच्चा-धिकारियों के साथ ऑनलाइन बातचीत की। उच्चा्धिकारियों के साथ बातचीत के दौरान विदेशमंत्री ने उनके साथ परियोजना के कार्यान्वयन संबंधी मामलों तथा द्विपक्षीय संबंधों पर विचार विमर्श किया। उन्होंने सभी देशों से यह आग्रह किया कि भारत द्वारा दूर-शिक्षा और दूर-चिकित्सा के क्षेत्र में प्रदान की जा रही सेवाओं का पूरा-पूरा लाभ उठाएं।

उद्घाटन के बाद विदेश मंत्री माननीय श्री एस एम कृष्णा ने राजनयिकों और मिडिया के सदस्यों को संबोधित किया जिसमें उन्होंने बताया कि भारत और अफ्रीका के बीच बढ़ती हुई साझेदारी का सबसे अच्छा उदाहरण पैन अफ्रीकी ई-नेटवर्क परियोजना है। उन्होंने कहा कि दूर-शिक्षा और दूर-चिकित्सा के क्षेत्र में अफ्रीका में ली गई अब तक की यह सबसे बड़ी परियोजना है। मंत्री जी ने कहा कि अफ्रीकी देशों को ई-गवर्नेन्स, ई-कामर्स, इनफोटेनमेंट , रिसोर्स मैपिंग, मौसम विज्ञान के क्षेत्र में सहायता करने के लिए इस परियोजना को सुसज्जित किया गया है। इसके साथ-साथ परियोजना के अंतर्गत अफ्रीकी देशों के शासनाध्यक्षों को अति सुरक्षित बद्ध उपग्रह नेटवर्क के माध्यम से वी वी आई पी कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। अब तक 47 देशों ने इस परियोजना में भागीदारी कर ली है। 34 देशों ने इसको कार्यान्वित कर लिया है और शेष देश इस वर्ष के अंत तक उत्तरोतर इसको पूरा कर लेंगे। 11 देशों के लिए पैन अफ्रीकी ई-नेटवर्क परियोजना के प्रथम चरण का उद्घाटन तत्कालीन विदेश मंत्री द्वारा फरवरी, 2009 में किया गया था। (इन देशों में बेनिन, बुर्किनाफासों, गबोन, गांबिया, घाना, इथियोपिया, मारिशस, नाइजीरिया, रवांडा, सेनेगल व सिचेल्स शामिल हैं)

पैन अफ्रीकी ई-नेटवर्क परियोजना का मूल उद्देश्य भारत के कुछ सर्वोत्तम विश्व विद्यालयों/ शैक्षिक संस्थाओं से विभिन्न शिक्षा क्षेत्रों में अफ्रीका के 10,000 विद्यार्थियों को 5 वर्ष की अवधि में अच्छीं शिक्षा प्रदान करने में अफ्रीका की मदद करना है। इसके अलावा अफ्रीका में रोगी अंत्य स्थानों पर चिकित्सकों को दूर-चिकित्सा सेवा के माध्यम से ऑनलाइन परामर्श अफ्रीकी संघ द्वारा अपने सदस्य देशों के लिए चयनित विभिन्न् चिकित्सा क्षेत्र विशषज्ञताओं में भारतीय चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा प्रदान किया जाएगा।

पैन अफ्रीका ई-नेटवर्क परियोजना की संकल्पना पूर्व राष्ट्रपति माननीय डॉ. ए पी जे कलाम द्वारा की गई थी तथा 5 जुलाई, 2007 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इसका अनुमोदन किया गया था। इसकी बजट लागत 542.90 करोड़ रु. (125 मिलियन अमरीकी डालर) हैं जिसमें हार्डवेयर और सॉफट्वेयर की आपूर्ति, संस्थापना, परीक्षण और प्रारंभण, एक सिरे से दूसरे सिरे तक कनेक्टिविटी, उपग्रह बैंडविड्थ, परिचालन व अनुरक्षण सहायता और 5 वर्ष तक 53 अफ्रीकी देशों को दूर-शिक्षा व दूर-चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की लागत शामिल है। इस परियोजना के लिए विदेश मंत्रालय को नियंता (नोडल) मंत्रालय बनाया गया है, तथा टेलीकम्युनिकेशन्स कंसलटेंट्स इंडिया लिमिटेड (टीसीआईएल) इस परियोजना का कार्यान्वयन टर्नकी आधार पर कर रहा है।

दूर-शिक्षा तथा दूर-चिकित्सा सेवाएं नियमित रूप से इस नेटवर्क पर प्रारंभ की जा चुकी हैं। इस समय दूर-चिकित्सा- परामर्श जरूरत के अनुसार भारत के अति विशेषज्ञतायुक्त अस्पतालों से अफ्रीकी देशों को प्रदान किया जा रहा है। इतना ही नहीं भारत के 11 अति विशेषज्ञतायुक्त अस्पतालों से 22 अप्रैल, 2009 से नियमित रूप से सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) सत्रों की शुरूआत हो चुकी है। अब तक इस नेटवर्क पर सीएमई के 654 सत्र पूरे कर दिए गए हैं। भारत से दूर-शिक्षा सेवाओं के अंतर्गत भारत के शीर्ष सतर के 5 विभिन्न विश्व विद्यालयों में 2000 से अधिक अफ्रीकी विद्यार्थियों का नामांकन किया जा चुका है जो शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों जैसे एम.बी.ए., वित्त नियंत्रण में स्नातकोत्तर डिग्री, सूचना प्रौद्योगिकी में स्नाततकोत्त‍र डिप्लोमा, सूचना प्रौद्योगिकी में एम.एससी तथा वित्त व निवेश विश्लेषण में स्नातक तथा अनेक अन्य में किया गया है। दूर-शिक्षा के सत्रों का भारत से नियमित रूप से सीधा प्रसारण किया जा रहा है और इन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों ने अत्याधिक रूचि दर्शायी है।

टीसीआईएल ने टीसीआईएल भवन, नई दिल्ली में डेटा सेंटर सहित इस नेटवर्क की स्थापना की है। यह डेटा सेंटर अफ्रीकी संस्थानों से भारतीय संस्थानों की कनेक्टिविटी के लिए डकार स्थित हब स्टेशन के लिए मुख्य द्वार के रूप में कार्य करेगा।

इस परियोजना के बारे में विस्‍तृत जानकारी निम्‍नलिखित वेबसाइट से प्राप्‍त की जा सकती है :

www.panafricanenetwork.com .

चित्र दीर्घा

मुखयपृष्ट  |   पीछे