निदेशक मंडल
श्री ए. शेषागिरि राव
अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक
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श्री ए. शेषागिरि राव ने वर्ष 1981 में जे.एन.टी.यू ककिनड़ा (आंध्र प्रदेश) से इलैक्ट्रॉनिक एवं संचार इंजिनियरिंग में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने अपने कैरिअर की शुरुआत 1982 बैच के आईआरएसएसई अधिकारी के रूप में रेलवे में की थी और उन्होंने सिग्नलिंग और संचार से जुड़े सभी क्षेत्रों में कार्य किया। उन्होने दक्षिण मध्य रेलवे यानि विजयवाड़ा और सिकंदराबाद में प्रमुख प्रभागों के शाखा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए निरंतर तीन वर्ष तक शील्ड प्राप्त की। दक्षिण मध्य रेलवे में उन्होंने कई प्रभागों में पुणे तक कई सिग्नलिंग परियोजनाओं का सफलतापूर्वक कार्यान्वयन करवाया। परियोजनाओं को समय से पहले पूरा करने के लिए उन्हें रेलवे बोर्ड पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शैक्षणिक क्षेत्र में भी उन्होंने न केवल वडोडरा में प्रोन्नत प्रबंधन कार्यक्रम में स्वर्ण पदक प्राप्त किया बल्कि अपनी स्कूलिंग के दौरान विशेष मेरिट स्कॉलरशिप भी प्राप्त की जोकि उनकी इंजिनियरिंग के पूरा होने तक जारी रही। उन्होंने स्कूल/कॉलेज/विश्वविद्यालय में राज्य स्तरीय एवं विश्वविद्यालय स्तरीय वरीयताएं प्राप्त की।

श्री ए. शेषागिरि राव ने वर्ष 2002 में अकेले ही रेलटेल के दक्षिणी क्षेत्र की शुरुआत की और वर्ष 2011 तक इसका पण्यावर्त 100 करोड़ तक पहुंच गया। अब इस क्षेत्र में पण्यावर्त 200 करोड़ को पार कर गया है और यहां आईसीटी से जुड़ी सभी प्रकार की नूतन और उच्च स्तरीय परियोजनाओं का कार्यान्वयन किया जा रहा है. वे वर्ष 2012 में निदेशक (विपणन एवं योजना) बने और उनके कार्यकाल के दौरान पण्यावर्त में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई और कंपनी सिंगल बैंडविड्थ प्रदाता से संपूर्ण तंत्र प्रचालक में परिवर्तित हुई और कंपनी ने सहयोगकारी प्रवृत्ति के साथ व्यवसाय के नए क्षेत्रों में सफलता की नई गाथाएं लिखीं। रेलटेल और रेलवे में उनका असीम और गौरवशाली अनुभव निश्चित रूप से टीसीआईएल को एक बड़े स्तर पर लाभांवित करेगा।

श्री ए. के. गुप्ता
निदेशक (वित्त)
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श्री ए. के. गुप्ता अर्हताप्राप्त सनदी लेखाकार हैं तथा भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान के रत्न सदस्य हैं। उन्होंने एल एल बी (सांव्यावसायिक) की डिग्री प्राप्त की है तथा व्यापार व व्यवसाय की अंतरराष्ट्रीय विधि में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्ती किया है। उनका विनिर्माण, परामर्श, इंजीनियरी, संविदाकारी तथा दूरसंचार सेवा प्रदान करने का कार्य करने वाली विख्यात कंपनियों में कार्य करने का 32 वर्ष से भी अधिक अविध का अनुभव है। उन्होंने केंद्रीय और प्रांतीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में कार्य किया है। वित्त व लेखा, बजट और बजट संबंधी नियंत्रण, जोखिम प्रबंध, विदेशी मुद्रा प्रबंध, कराधान, निवेश मूल्यांकन, प्रबंधकीय लेखाकरण एवं रिपोर्टिंग के लिए प्रक्रियाओं और पद्धतियों का निरूपण व परियोजनाओं के वित्तीय मूल्यांकन के क्षेत्रों में उनका व्या‍पक अनुभव है। बहुपक्षीय एजेन्सियों, विनिमय नियंत्रण प्राधिकरणों तथा वित्तीय संस्था्ओं के साथ प्रभावशाली ढंग से व्यवहार करने का उनका विस्तृत अनुभव है। भारत और विदेशों में संयुक्त उद्यमों की स्थापना तथा उनका कारोबार बढा़ने में उन्होंने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दिनांक 01.07.2011 को निदेशक (वित्त) का कार्यभार ग्रहण करने से पहले वे टीसीआईएल में कार्यपालक निदेशक (वित्त व कारोबार विकास) के पद पर कार्यरत थे।

श्री राजेश कपूर
निदेशक(तकनीकी)
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श्री राजेश कपूर 54 वर्ष के हैं, इन्होंने वर्ष 1983 में टेलीकम्युनिकेशन्स कंसलटेंट्स इंडिया लि. में नियुक्ति प्राप्त की। वह विशिष्ट योग्यता (ऑनर्स) के साथ प्रथम श्रेणी में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ (पंजाब विश्वविद्यालय) से बीएससी इंजीनियरिंग (इलैक्ट्रॉनिक्स एवं इलैक्ट्रीकल कम्युनिकेशन्स) में शिक्षा प्राप्त हैं। इन्हें परियोजना प्रबंधन और निष्पादन, परामर्श, व्यापार विकास का संचालन प्रबंधन, रणनीतिक प्रबंधन, प्रणाली विशलेषण, डिजाइन सॉफ्टवेयर के विकास, प्रशिक्षण से सबंधित सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार से सबंधित परियोजनाओं के क्षेत्र में विभिन्न पदों पर 30 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। 30 अगस्त 2012 को निदेशक के रूप में कार्यभार ग्रहण करने से पहले वे टी सी आई एल में समूह महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत थे।
इन्होंने पैन अफ्रीका ई-नेटवर्क परियोजना को और अधिक उन्नत बनाते हुए उसे अफ्रीका स्थित 48 देशों के साथ भारतीय अस्पतालों और विश्वविद्यालयों के जोड़ कर पैन अफ्रीकी ई-नेटवर्क परियोजना को लागू किया और भारत और विदेशों में विभिन्न दूरसंचार ग्राहकों के लिए विकसित केबल नेटवर्क प्रबंधन प्रणाली का विकास किया है।

श्री राजीव गुप्ता
निदेशक(परियोजना)
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श्री राजीव गुप्ता नें वर्ष 1982 में दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बी. एस. सी. में शिक्षा प्राप्त की है और एमडीआई गुड़गांव से सार्वजनिक नीति और प्रबंधन में प्रबंधन का स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इन्हें दूरसंचार के विभिन्न क्षेत्रों में 30 वर्षों से भी अधिक का अनुभव प्राप्त है।

श्री गुप्ता नें अपने कैरियर की शुरुआत रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी आर डी ओ) और भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बी एच ई एल) से की। वर्ष 1984 में श्री गुप्ता दूरसंचार विभाग में शामिल हुए। श्री गुप्ता ने भारत सरकार के कई विभागों व उपक्रमों जैसे भारत संचार निगम लि. (बी एस एन एल), महानगर टेलीफोन नि. लि. (एम टी एन एल), में भी कार्य किया है और वर्ष 1984 से लेकर 03.06.2015 तक वे टी सी आई एल में कार्यरत रहे। उनके पूर्व कार्यों में कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन विकास) टी सी आई एल, कार्यपालक निदेशक (व्यापार विकास) टी सी आई एल, उपमहानिदेशक (रक्षा नीति), दूरसंचार विभाग, उपमहानिदेशक (दूरसंचार इंजीनियरिंग केन्द्र), वरिष्ठ महाप्रबंधक (दूरसंचार जिला), भागलपुर, परियोजना निदेशक (ओमान), टी सी आई एल, समूह महाप्रबंधक (टी सी आई एल), उप महानिदेशक (पी जी), दूरसंचार विभाग / संयुक्त उपमहानिदेशक (जी पी), दूरसंचार विभाग आदि शामिल हैं।

Sh. Shashi Ranjan Kumar
Director (Govt. Nominee)
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श्री शशिरंजन कुमार, श्री शशिरंजन कुमार ने वर्ष 1989 में आईआईटी दिल्ली से इलैक्ट्रीकल इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधी प्राप्त की। कुछ समय तक इंडियन रेलवे में इलेक्ट्रकल इंजीनियरिंग के रुप में कार्य करने पश्चात इन्होंने वर्ष 1992 में भारतीय प्रशानिक सेवा में कदम रखा। इन्होंने त्रिपुरा राज्य में उप प्रभागीय अधिकारी, जिला मजिस्ट्रेट और क्लैक्टर आदी के पदों पर अपनी सेवाएं दीं। श्री शशिरंजन ने कुछ समय तक झारखंड में भी कार्य किया जहां वे गुमला जिले के उपायुक्त (डिप्टी कमिशनर) और रांची नगर निगम के उपायुक्त थे। वर्ष 2006 से 2011 के दौरान, भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में औद्योगिक निति और संवर्धन विभाग में निदेशक के पद पर कार्य किया। उन्होंने त्रिपुरा सरकार के बिजली विभाग और योजना विभाग में भी सचिव के पद पर कार्य किया।
वर्तमान में श्री शशि रंजन कुमार संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के दूरसंचार विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्य कर रहे हैं।

श्रीमती सुमिता पुरकायस्थ
निदेशक (सरकारी नामिति)
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श्रीमती सुमिता पुरकायस्थ, श्रीमती सुमिता पुरकायस्थ ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर निष्णात डिग्री प्राप्त की और इसके बाद वित्त विषय में एमबीए किया। वर्ष 1983 में वे आईपी एवं टी (ए एंड एफ) में शामिल हुईं। इससे पहले उन्होंने कुछ समय तक स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) में प्रबंधन प्रशिक्षु के रूप में भी कार्य किया। आईपी में शामिल होने के बाद उन्होंने दूरसंचार विभाग, डाक विभाग में महाप्रबंधक एवं आईएफए कोलकाता टेलीफोन्स, महाप्रबंधक (निवेशक संबंध एवं नैगमिक खाते), एमटीएनएल नैगमिक कार्यालय( जिसमें उन्होंने न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (एनवाईएसई) में एमटीएनएल की लिस्टिंग के लिए प्रमुख भूमिका निभाई) में कार्य किया। इसके पश्चात वे कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य रहीं – महाप्रबंधक (वित्त व लेखापरीक्षा), बीएसएनएल नैगमिक कार्यालय, सीसीए जे एंड के सर्किल एवं महानिदेशक, राष्ट्रीय वित्त संचार संस्थान. महानिदेशक, एनआईसीएफ के पद पर रहते हुए उन्होंने भारत और विदेश में कई प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सेमीनारों और कार्यशालाओं में भाग लिया। वर्तमान में वे दूरसंचार विभाग में दिल्ली के उत्तरी अंचल में संचार लेखों की प्रधान नियंत्रक के रूप में कार्यरत हैं।

श्रीमती रेखा जैन
स्वतंत्र निदेशक
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श्रीमती रेखा जैन , श्रीमती रेखा जैन वर्तमान में भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद के आईआईएमए-आईडीईए दूरसंचार उत्कृष्टता केंद्र कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रोफेसर हैं। उन्होंने वर्ष 1985 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजिनियरिंग विभाग से पी.एचडी, वर्ष 1977-79 में जेएनयू, नई दिल्ली से एम.फिल, और वर्ष 1976 में दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.एससी की डिग्री प्राप्त की। उन्हें वर्ष 1997-98 में दूरसंचार विनियमन पर सीनियर फुलब्राइट फैलोशिप प्रदान की गई। वर्ष 2011 के दौरान वे ब्राजील के फुंडाशियो डम कैब्रेल (एफडीसी) से जुड़ी रहीं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रख्यात पत्रिकाओं में उनके आलेख प्रकाशित हुए हैं और वे वैश्विक सूचना प्रबंधन पत्रिका (जेजीआईएम) की बोर्ड सदस्य और कई व्यवसायिक संगठनों की बोर्ड सदस्य हैं। वे दूरसंचार एवं आईटी सेक्टरों में कई राष्ट्रीय स्तर की समितियों की सदस्य रह चुकी हैं और सदस्य हैं। उन्होंने विश्व बैंक, डीएफआईडी, राष्ट्रमंडल दूरसंचार संगठन, आईडीआरसी, दूरसंचार विभाग, नैस्कॉम, डाक विभाग, छठा वेतन आयोग, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़, विद्युत एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग इत्यादि के साथ कार्य किया। वे वर्ष 2013-15 में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की सदस्य रह चुकी हैं। वे टेलीकम्युनिकेशन्स कंसलटेंट्स इंडिया लि. के बोर्ड की सदस्य हैं। उन्हें आईआईएमए के विभिन्न पदों पर कार्य करने का प्रशासनिक अनुभव प्राप्त है। वर्ष 1997 से 2007 तक वे दूरसंचार नीति अध्ययन केंद्र की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्होंने वर्ष 2010-12 तक स्नातकोत्तर कार्यक्रमों, वर्ष 2006-08 तक डॉक्टरल कार्यक्रम और वर्ष 2002-05 तक प्रतिस्थापन कार्यक्रमों की अध्यक्षता की। वर्ष 1976 से 77 तक उन्होंने एक वर्ष तक भारतीय स्टेट बैंक में भी काम किया।

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